ख़ामोशी में ये किसकी चीख सुनाई देती है
पश-ए-आइना कैसी तस्वीर दिखाई देती है
ये मेरी जिंदगी है या मौत मेरे मौत का आलम है
कभी रूकती है तो कभी भागती दिखाई देती है
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वो लम्हा कोई और था जाम पीते भी थे छलकाते भी थे
अब तो "धरम" जाम परोसते भी हैं और पी भी नहीं पाते
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ग़म-ए-ज़ीस्त का हर क़िस्त अदा कर दिया
रखकर कांटे मैंने फूलों को जुदा कर दिया
दूर तक वो पहलू अब कहीं नज़र नहीं आता "धरम"
की जिसमे सर रखकर सांस लूं थोड़ी देर सो सकूँ
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इश्क का हरेक पन्ना अब जलकर राख हो गया
मेरी जिंदगी तो यूँ ही जलकर अब खाक हो गया
एक बेवफा को न जाने क्यूँ ऐसी प्यास जगी
की मेरा ही इश्क "धरम" उसका खुराक हो गया
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हजारों मतभेद थे सिर्फ एक इत्तेफाक निकला
उनके दर्द से हमारा वही पुराना ताल्लुकात निकला
पश-ए-आइना कैसी तस्वीर दिखाई देती है
ये मेरी जिंदगी है या मौत मेरे मौत का आलम है
कभी रूकती है तो कभी भागती दिखाई देती है
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वो लम्हा कोई और था जाम पीते भी थे छलकाते भी थे
अब तो "धरम" जाम परोसते भी हैं और पी भी नहीं पाते
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ग़म-ए-ज़ीस्त का हर क़िस्त अदा कर दिया
रखकर कांटे मैंने फूलों को जुदा कर दिया
दूर तक वो पहलू अब कहीं नज़र नहीं आता "धरम"
की जिसमे सर रखकर सांस लूं थोड़ी देर सो सकूँ
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इश्क का हरेक पन्ना अब जलकर राख हो गया
मेरी जिंदगी तो यूँ ही जलकर अब खाक हो गया
एक बेवफा को न जाने क्यूँ ऐसी प्यास जगी
की मेरा ही इश्क "धरम" उसका खुराक हो गया
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हजारों मतभेद थे सिर्फ एक इत्तेफाक निकला
उनके दर्द से हमारा वही पुराना ताल्लुकात निकला
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