अब कहीं कोई बेवफा नहीं होता
मोहब्बत भी अब रुसवा नहीं होता
ज़माने ने बदल दिए हैं मोहब्बत के उसूल
अब कहीं कोई बेपर्दा नहीं होता
इश्क अब हुस्न बनकर बाज़ार में बिकता है
अब कोई दीदावर खरीददार नहीं मिलता
हुस्न हरेक दौलतमंद का चौखट चूमता है
झुककर सलाम करता है "धरम"
मयवस्ल भी खुलेआम करता है
मोहब्बत भी अब रुसवा नहीं होता
ज़माने ने बदल दिए हैं मोहब्बत के उसूल
अब कहीं कोई बेपर्दा नहीं होता
इश्क अब हुस्न बनकर बाज़ार में बिकता है
अब कोई दीदावर खरीददार नहीं मिलता
हुस्न हरेक दौलतमंद का चौखट चूमता है
झुककर सलाम करता है "धरम"
मयवस्ल भी खुलेआम करता है
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