दूर
मुझसे बहुत दूर
इतनी दूर
की अब दूरी पाटी भी न जा सके
बेसबब तुम्हारा जाना
तुम्हारा जाना
जैसे वक़्त का गुजर जाना
हाँ, मगर
कुछ कही, कुछ अनकही यादों का
हमेशा सिरहाने से लगा रहना
कमरे के दीवार-ओ-फर्श मायूस हैं
उनको पता है तुम्हारा जाना
हाँ मगर छत
अब भी तेरी सूरत को
संजोये रक्खा है
जब भी कभी ऊपर देखता हूँ
तुम्हारी सूरत नजर आती है
मुझसे बहुत दूर
इतनी दूर
की अब दूरी पाटी भी न जा सके
बेसबब तुम्हारा जाना
तुम्हारा जाना
जैसे वक़्त का गुजर जाना
हाँ, मगर
कुछ कही, कुछ अनकही यादों का
हमेशा सिरहाने से लगा रहना
कमरे के दीवार-ओ-फर्श मायूस हैं
उनको पता है तुम्हारा जाना
हाँ मगर छत
अब भी तेरी सूरत को
संजोये रक्खा है
जब भी कभी ऊपर देखता हूँ
तुम्हारी सूरत नजर आती है
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