Friday, 2 August 2013

तुम्हारा जाना

दूर
मुझसे बहुत दूर
इतनी दूर
की अब दूरी पाटी भी न जा सके
बेसबब तुम्हारा जाना

तुम्हारा जाना
जैसे वक़्त का गुजर जाना
हाँ, मगर
कुछ कही, कुछ अनकही यादों का
हमेशा सिरहाने से लगा रहना

कमरे के दीवार-ओ-फर्श मायूस हैं
उनको पता है तुम्हारा जाना
हाँ मगर छत
अब भी तेरी सूरत को
संजोये रक्खा है
जब भी कभी ऊपर देखता हूँ
तुम्हारी सूरत नजर आती है

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