पुराने किताबों के हर्फ़ धुंधले हो चले
जो पहले जवां थे अब बूढ़े हो चले
कोई हाथ अब थामने के लिए नहीं उठता
वो बुजुर्गों की थाथी अब कहीं नहीं दीखता
जरा सी बात पर यूँ अकड़ जाते हैं लोग
अब कोई मानवता का नाता नहीं दीखता
जो बुजुर्ग हैं अब छुपकर निकलते हैं
अब कहीं कोई पर्दा नजर नहीं आता
जो पहले जवां थे अब बूढ़े हो चले
कोई हाथ अब थामने के लिए नहीं उठता
वो बुजुर्गों की थाथी अब कहीं नहीं दीखता
जरा सी बात पर यूँ अकड़ जाते हैं लोग
अब कोई मानवता का नाता नहीं दीखता
जो बुजुर्ग हैं अब छुपकर निकलते हैं
अब कहीं कोई पर्दा नजर नहीं आता
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