Tuesday, 10 September 2013

मोहब्बत

मोहब्बत यूँ ही कोई इत्तेफाक नहीं होता
इसमें दिल तो जलता है मगर खाक नहीं होता

मोहब्बत के अपने कई सारे उसूल होते हैं
एक जिस्म दूसरे जिस्म का सिर्फ खुराक नहीं होता

तन्हाई देखी  इश्क किया  रुसवा भी हुए
दुनिया के नज़र में ये रिश्ता-ए-पाक नहीं होता

मैंने कभी मोहब्बत में इबादत नहीं किया "धरम"
इबादत के दो-चार लफ्ज़ मोहब्बत का फलसफा नहीं होता

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