मैं जो उसका हुआ तो बस बे-आबरू हो गया
अब ज़िस्म के साथ जाँ भी बाज़ारू हो गया
जो धड़कता था दिल कभी अपने मिज़ाज़ से
अब उस बे-वफ़ा के इश्क़ से बीमारू हो गया
मिलाकर अश्क ज़हर में मैं रोज पीता रहा
ऐ दर्द-ए-हिज्र मैं तो तुम से रू-ब-रू हो गया
मत झांको अब किसी के दिल में ऐ "धरम"
अब तो यहाँ हर रिश्ता तश्न-ए-खूं हो गया
अब ज़िस्म के साथ जाँ भी बाज़ारू हो गया
जो धड़कता था दिल कभी अपने मिज़ाज़ से
अब उस बे-वफ़ा के इश्क़ से बीमारू हो गया
मिलाकर अश्क ज़हर में मैं रोज पीता रहा
ऐ दर्द-ए-हिज्र मैं तो तुम से रू-ब-रू हो गया
मत झांको अब किसी के दिल में ऐ "धरम"
अब तो यहाँ हर रिश्ता तश्न-ए-खूं हो गया
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