1.
लिखकर पैमाने पर तेरा नाम मैं अपने होठों से लगा लूँ
तेरे शक्ल में ग़र कोई दूसरा भी आए तो उसे मैं अपना लूँ
2.
बड़ी तरतीब से टूटा है सीना मेरा आज दो बराबर टुकड़ों में "धरम"
एक हिस्सा उसका मुस्कुराता चेहरा और दूसरा मेरा अनकहे जज़्बात
3.
फ़कीरी का नशा उसपर कुछ इस तरह तारी है
अमीरों के दौलत-ए-नशा पर वह हमेशा भारी है
4.
पानी पर खिचीं लकीरों का कोई वज़ूद नहीं होता
अब तो यहाँ कोई भी रिश्ता बे-सूद नहीं होता
लिखकर पैमाने पर तेरा नाम मैं अपने होठों से लगा लूँ
तेरे शक्ल में ग़र कोई दूसरा भी आए तो उसे मैं अपना लूँ
2.
बड़ी तरतीब से टूटा है सीना मेरा आज दो बराबर टुकड़ों में "धरम"
एक हिस्सा उसका मुस्कुराता चेहरा और दूसरा मेरा अनकहे जज़्बात
3.
फ़कीरी का नशा उसपर कुछ इस तरह तारी है
अमीरों के दौलत-ए-नशा पर वह हमेशा भारी है
4.
पानी पर खिचीं लकीरों का कोई वज़ूद नहीं होता
अब तो यहाँ कोई भी रिश्ता बे-सूद नहीं होता
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