Thursday, 27 July 2017

किस तरह से ये हौशला रखा

क्यूँ कर हमेशा तुमने दो कदम का फ़ासला रखा
पहलू में आने-जाने का लगातार सिलसिला रखा

कभी मिलने पर असीम ख़ुशी कभी तो सिर्फ बेरुख़ी
कि कैसे तुमने बनाकर मुझे महज़ एक मामला रखा  

कि जिस बात पर हँसे ठीक उसी बात पर रो भी दिए
कैसे अपने मिजाज़ में इस तरह का तबादला रखा

मेरे हर हुनर पे तेरी आखों का एक बूँद पानी भारी था
कि अपने अश्क़ को मेरे लिए बनाकर जलजला रखा

कि तेरी सासें मेरा जिस्म औ" मेरी सासें तेरा जिस्म
बाद इसके भी तुमने इश्क़ का कोई और मरहला रखा

कि इश्क़ का क़त्ल करके हुस्न के बुलंदी तक पहुंचे
किस तरह से "धरम" तुमने खुद में ये हौशला रखा 

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