क्यूँ यहाँ परिंदा खुद अपना पर ढूँढ़ता है
जो मेरे साथ है वो भी हमसफ़र ढूँढ़ता है
कल तो मेरे लुटने की ख़बर मिल गई थी
अब ये बता की तू कौन सी ख़बर ढूँढ़ता है
कि यही है तेरे बुलंदी औ" मेरे ग़र्क की मंज़िल
अब तू ये बता कि यहाँ कौन सा डगर ढूँढ़ता है
तेरे बाहों की ठंढक में हर दिल पत्थर हो जाता है
हर कोई तेरे पहलू में आकर दूसरा बसर ढूँढ़ता है
जो मिली है तुझको "धरम" तेरे कर्मों का फल ही है
इसमें तू क्यूँ किसी बद-दुवा का कोई असर ढूँढ़ता है
जो मेरे साथ है वो भी हमसफ़र ढूँढ़ता है
कल तो मेरे लुटने की ख़बर मिल गई थी
अब ये बता की तू कौन सी ख़बर ढूँढ़ता है
कि यही है तेरे बुलंदी औ" मेरे ग़र्क की मंज़िल
अब तू ये बता कि यहाँ कौन सा डगर ढूँढ़ता है
तेरे बाहों की ठंढक में हर दिल पत्थर हो जाता है
हर कोई तेरे पहलू में आकर दूसरा बसर ढूँढ़ता है
जो मिली है तुझको "धरम" तेरे कर्मों का फल ही है
इसमें तू क्यूँ किसी बद-दुवा का कोई असर ढूँढ़ता है
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