Friday, 1 September 2017

चंद शेर

1.
खुद से खुद ही रूठे 'धरम' फिर खुद मना भी लिए
कि खुद ही अपना दिल बुझाये औ" जला भी लिए

2.
वक़्त बदला फ़ासला बढ़ा औ" बूढ़ी हो गई राह तकती आखें
क्या कहें "धरम" ज़माने में किस-किस को भुलाना पड़ता है

3.
हर किसी को 'धरम' आसमाँ से इस ज़मीं पर आना पड़ता है
कि ख़ुद ही अपना दिल निकालकर उसे दफ़नाना पड़ता है

4.
तेरे बज़्म में रुस्वा होने के बाद ही 'धरम' मुझे सुकूँ मिलता है
क्या कहें कि मौत के बाद ही ज़िंदगी जीने का जुनूँ मिलता है

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