Saturday, 23 September 2017

चंद शेर

1.
जिस जहाँ के तुम खरीददार थे वहाँ तो हम बिक न सके
किसी और दूसरे ज़हाँ में 'धरम' मुझे बिकना गँवारा नहीं

2.
आज जरा हौशले से सुनो मुझे 'धरम' कि हाँ महज़ एक चीख ही हूँ मैं
मैं भूला नहीं हूँ कि तेरे दामन को मिला एक अनचाही भीख ही हूँ मैं

3.
कि ख़ुद मेरे ही घर में "धरम" कितनी वीरानी लगी मुझे
जब सोचने लगा तो तेरी सारी बातें आसमानी लगी मुझे

4.
कोई और वादा नहीं चाहिए तेरे इस वादा-ए-सुखन के बाद
कि अब कोई जहाँ नहीं चाहिए "धरम" इस कफ़न के बाद

5.
बाद तेरे नाम के "धरम" मैंने जो भी लिखा वो इबादत है
कि ये कुछ और नहीं हर हर्फ़ में लिपटी तेरी मोहब्बत है

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