1.
कि जब वक़्त ने तोड़ी थी चुप्पी मेरे दिल में सिर्फ तन्हाई थी
मोहब्बत में मैं वहां रुक गया "धरम" बाद जिसके रुस्वाई थी
2.
अपने ज़ख्म-ए-दिल का 'धरम' ये मंज़र तो देखो
किस अंदाज़ से सीने में चुभा है ये खंज़र तो देखो
3.
कि किस ख़्याल को दिल में रखूं किसको निकाल दूँ
जी तो करता है 'धरम' कि खुद अपना दिल हलाल दूँ
4.
ज़ख्मों को अभी और सर होना है कि और भी दुखते-जिगर होना है
जो ख्वाब कभी देखा ना था 'धरम' हक़ीक़त ही उसका क़हर होना है
कि जब वक़्त ने तोड़ी थी चुप्पी मेरे दिल में सिर्फ तन्हाई थी
मोहब्बत में मैं वहां रुक गया "धरम" बाद जिसके रुस्वाई थी
2.
अपने ज़ख्म-ए-दिल का 'धरम' ये मंज़र तो देखो
किस अंदाज़ से सीने में चुभा है ये खंज़र तो देखो
3.
कि किस ख़्याल को दिल में रखूं किसको निकाल दूँ
जी तो करता है 'धरम' कि खुद अपना दिल हलाल दूँ
4.
ज़ख्मों को अभी और सर होना है कि और भी दुखते-जिगर होना है
जो ख्वाब कभी देखा ना था 'धरम' हक़ीक़त ही उसका क़हर होना है
No comments:
Post a Comment
Note: only a member of this blog may post a comment.