Tuesday, 10 October 2017

चंद शेर

1.
हमारे दरम्यां बात यदि छोटी सी थी तो बन ही क्यूँ न गई
औ" यदि वो बात अना की थी 'धरम' तो ठन ही क्यूँ न गई

2.
किस आरज़ू से बात रखूं "धरम" कि हर आरज़ू पे जी घबराता है
कि सामने तुम हो या तुम्हारा अक्स ये दिल समझ नहीं पाता है

3.
नहीं था चाहना तुमको टूटकर कि यूँ बिखरना मुझे गंवारा नहीं
अंजाम तो यही होना था "धरम" तुम मेरे नहीं मैं तुम्हारा नहीं

4.
उसकी अदाओं में बारूद है "धरम" वो बोलती है तो बम फटते हैं
औ" हमारी फितरत तो यही है कि बड़ी ख़ामोशी से हम कटते हैं

5.
कौन रुख़्सत हुआ है यहाँ से 'धरम' किसकी सारी यादें मिट गई हैं
कि अभी जो फैलीं थी चार-ओ-सू बस एक झटके में सिमट गई हैं

6.
पुराना ख़्वाब था 'धरम' खुली आखों में ही भर आया
कि गुज़रे लम्हों का ज़ख्म देखो फिर से उभर आया 

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