कि जिनसे उम्मीद-ए-लुत्फ़ थी अब वही ख़ाक हो गए
बस एक उसके जाने से मेरे सारे अरमाँ हलाक़ हो गए
कि ख़ुद बिखर के टूटे भी औ" टूट के फिर बिखर भी गए
खुद को क्या सिलें क्या छोड़ें जब खुद ही से चाक हो गए
कि फिर से जल उठने रौशन होने की उम्मीद ही बुझ गई
जब से हम हवा के महज़ एक ही झोकें के ख़ुराक़ हो गए
कि ये आप को मुबारक़ हो ये आप ही के दामन-ए-पाक़ हैं
आपके पहलू में आकर हाय! मेरे सारे इरादे नापाक़ हो गए
कि न तो कोई ग़म ठहरता है न कोई ख़ुशी ही ठहरती है
क्यूँ कर मेरे दामन में "धरम" इतने सारे सुराख़ हो गए
बस एक उसके जाने से मेरे सारे अरमाँ हलाक़ हो गए
कि ख़ुद बिखर के टूटे भी औ" टूट के फिर बिखर भी गए
खुद को क्या सिलें क्या छोड़ें जब खुद ही से चाक हो गए
कि फिर से जल उठने रौशन होने की उम्मीद ही बुझ गई
जब से हम हवा के महज़ एक ही झोकें के ख़ुराक़ हो गए
कि ये आप को मुबारक़ हो ये आप ही के दामन-ए-पाक़ हैं
आपके पहलू में आकर हाय! मेरे सारे इरादे नापाक़ हो गए
कि न तो कोई ग़म ठहरता है न कोई ख़ुशी ही ठहरती है
क्यूँ कर मेरे दामन में "धरम" इतने सारे सुराख़ हो गए
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