Sunday, 30 September 2018

चंद शेर

1.
सफर में कुछ ही दूर चलने के बाद बाकी बची दूरी का पता नहीं चला
कि उसकी मेहरबानी औ" ख़ुद अपनी ही मजबूरी का पता नहीं चला

2.
उसे किसी भी बात का 'धरम' अब कोई भी नहीं है मलाल
पहले तो सिर्फ ज़िस्म नंगा था अब बदन पर नहीं है खाल

3.
मेरा चिराग़-ए-जां बुझने से पहले एक बार जरूर देखना
कि मेरे मौत से पहले एक बार मुझको मेरे हुज़ूर देखना

4.
कि क्यूँ तेरा हर रिश्ता 'धरम' या तो बोझ या बनावटी होता है
रूह ज़िस्म जां हर किसी का मिलन सिर्फ दिखावटी  होता है

5.
बात दिल से ज़ुबाँ तक आते-आते कई बार हलक़ से चढ़ता उतरता रहा
कभी "धरम" नाउम्मीदी कभी बेख़्याली तो कभी पज़ीराई उभरता रहा 

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