Friday, 5 October 2018

चंद शेर

1.
यदि मैं ज़मीं भी देखूँ "धरम" तो खुला आसमान दिखता है
मुझे तो हर ओर सिर्फ अपने ही मौत का सामान दिखता है 

2.
कि यह तय कर दिया कि वो मौत नहीं तमाशा था
क्यूंकि मरने वाले का भार "धरम" महज माशा था

3.
हमारे कोष के जो भी बचे-खुचे सितारे गर्दिश में थे अब वो भी डूब गए
अब तो किस्मत के अलावा 'धरम' हम ख़ुद अपने आप से भी ऊब गए

4.
ख़ुर्शीद कल भी निकलेगा दोनों ज़िस्म कल भी जलेंगे मगर वो तपिश न होगी
हम साथ भी रहेंगे बातें भी होंगी "धरम" दरम्यां हमारे मगर वो कशिश न होगी

5.
हर हद से ऊँची उड़ान उड़ना ज़मीं तो ज़मीं तुम पूरा आसमान उड़ना
एक ही ज़िंदगी में 'धरम' तुम मौत के बाद का भी सारा ज़हान उड़ना

6.
यहाँ किसको ख़्याल था कि हर बात पर मेरा दिल बैठता है
अब तो यहाँ किसी से भी मिलना 'धरम' मुश्किल बैठता है


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