Tuesday, 13 November 2018

चंद शेर

1.
उससे हर मुलाक़ात के बाद ख़ाक सहरा का उड़ाना पड़ता है
कि क्या कहें 'धरम' दिल लगाने के बाद दिल जलाना पड़ता है

2.
वहाँ अब आग जल रही है जहाँ से पहले कभी दरिया निकलता था
वहाँ अब सिर्फ खाई है "धरम" जहाँ पहले कभी दिल फिसलता था

3.
कहाँ  कभी नींद आई "धरम" जो उसके  उड़ने का एहसास हो
कोई रिश्ता कभी पनपा ही नहीं तो कैसे कोई दिल के पास हो

4.
चिराग़-ए-दिल से अब कोई रौशनी नहीं होती सिर्फ़ धुआँ निकलता है
ज़िन्दगी ऐसे मुक़ाम पर है "धरम" जो ना तो गुज़रता है न ठहरता है

5.
मुझमें अब कहाँ  कोई रहा "धरम" जो  मुझको जानता हो
वह शख़्स अब तो ज़िंदा भी नहीं जो मुझको पहचानता हो

6.
कि बाद उसके एक बार फिर से ज़िंदगी की एक शुरुवात करनी है
मौत में पेवस्त एक ज़िंदगी से "धरम" फिर से मुलाक़ात करनी है

7.
ग़र बारिश न बची हो "धरम" तो अब आग ही बरसे
बदन की यह प्यास बुझने को अब तो और न तरसे

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