Friday, 2 November 2018

चंद शेर

1.
अपनी प्यास का अंदाजा लगाये बिना वह दरिया में उतर गया
दरिया के बहाव में बहकर 'धरम' फिर न जाने वह किधर गया

2.
मेरे दिल में लगी आग 'धरम' किसी दश्त-ए-आग से कम तो न थी
वह आग सबकुछ जला गई दिल में उपजे एक सन्नाटे को छोड़कर

3.
सन्नाटा जब भी जलता है तो न राख़ बनता है न ही ग़ुबार उड़ता है
सिर्फ साँसें सुलगती हैं "धरम" दिल में एक अलग निगार बनता है

4.
ख़ुद अपनी ही लगाई आग को "धरम" क्यूँ बुझाने लगा
वो फिर से मुझे बे-वक़्त मौत की नींद क्यूँ सुलाने लगा

5.
एक ऐसा दिया जले दिल के अंदर "धरम" जिसकी रौशनी से बहार हो
क़रम ऐसा बरसे की दामन भर जाए खुशियों से औ" पूरा हर क़रार हो 

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