ख़्वाब कैसा भी हो उसे भर नज़र देखना जरुरी होता है
ये हम कैसे कह दें कि इश्क़ का हर रंग सिंदूरी होता है
ये सारे सामईन को कद्रदान समझूँ या फिर ग़ुलाम तेरा
तेरी महफ़िल में हर किसी का जवाब जी हुज़ूरी होता है
कैसे कह दें कि ये बोझ अब तो कभी न उठाया जाएगा
यहाँ अपनी लाश अपने कंधे पर ढ़ोना रोजगारी होता है
एक ज़िस्म दो रूहों को अपने अंदर कब उतार लेता है
जब दोनों रूहों का दोनों जिस्मों पर सरदारी होता है
ग़ुलाम के क़दमों में यूँ ही मालिक का सर नहीं झुकता
दोनों एक अलग ही दर्ज़े का "धरम" व्यापारी होता है
ये हम कैसे कह दें कि इश्क़ का हर रंग सिंदूरी होता है
ये सारे सामईन को कद्रदान समझूँ या फिर ग़ुलाम तेरा
तेरी महफ़िल में हर किसी का जवाब जी हुज़ूरी होता है
कैसे कह दें कि ये बोझ अब तो कभी न उठाया जाएगा
यहाँ अपनी लाश अपने कंधे पर ढ़ोना रोजगारी होता है
एक ज़िस्म दो रूहों को अपने अंदर कब उतार लेता है
जब दोनों रूहों का दोनों जिस्मों पर सरदारी होता है
ग़ुलाम के क़दमों में यूँ ही मालिक का सर नहीं झुकता
दोनों एक अलग ही दर्ज़े का "धरम" व्यापारी होता है
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