आगे बढ़ो कि ज़ख़्मों के निशान और भी होंगे
राह में मील के पत्थरों के बयान और भी होंगे
बुलंदी की मंज़िल पर तू अभी पहुँचा कहाँ है
बस बढ़ते चलो की आगे ढलान और भी होंगे
वो बात महज़ उस एक लम्हे की न रही होगी
पुराने लम्हे दोनों के दरमियान और भी होंगे
ख़बर न थी बज़्म में रात ख़ामोशी में गुजरेगी
यूँ महफ़िल में शामिल बे-ज़बान और भी होंगे
दिल में कोई याद नहीं ज़ख़्म सारा भर चुका
अब तो इस दिल के इम्तिहान और भी होंगे
एक ही बार में तीर निशाने तक नहीं पहुँचा
कि दरमियान दोनों के कमान और भी होंगे
जो तख़्त-नशीं थे उनको कभी यकीं न हुआ
कि उन आक़ाओं के हुक्मरान और भी होंगे
समंदर अभी पूरी तरह से सोया नहीं "धरम"
कि लहरें और भी होंगीं उफान और भी होंगे
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