Thursday, 27 March 2025

सूरज ने दमकना छोड़ दिया

क्या हुआ कि सितारों ने चमकना छोड़ दिया
चाँदनी मुरझाई सूरज ने दमकना छोड़ दिया

मक्कारी, फ़रेबी, बे-ईमानी बातें कैसी भी हो 
इन बातों को कहने में झिझकना छोड़ दिया

साक़ी का क़हर हो कि हो रिन्दों की बे-सब्री    
ऐसी बातों पर साग़र ने छलकना छोड़ दिया

मंज़र ज़ुल्म-ओ-सितम का हो या 'उरूज का      
अंदर किसी भी आग ने दहकना छोड़ दिया

बाद चैन-ओ-सुकूँ के भी आँखों में नींद नहीं 
थकन में पलकों ने भी  झपकना छोड़ दिया

आँखों में न अश्क़ रहा न ही लहू रहा 'धरम' 
तन्हाई में साँसों ने भी सिसकना छोड़ दिया 

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