Saturday, 27 April 2013

यादें


मैं वो यादें ले आया हूँ
जो तुम वहां छोड़ आई थी
तुम खुद से दफ़न कर दो इसे

मैं जब भी कभी
अपने जमीर की मिट्टी खोदता हूँ
मेरा हाथ कांपता है
यादों का कोई कद-काठी नहीं है
कब्र कितना लम्बा
कितना चौड़ा और कितना गहरा होगा
मुझे इसका कोई अंदाज़ा नहीं है

1 comment:

  1. wow....dum hai boss....

    aap itne acchey shayaar bhi hai.....

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