बलात्कार एक जघन्य और घृणित अपराध है . संसद द्वारा बनाये गए बलात्कार के नए कानून , जिसमें की अपराधी को आजीवन कारावास या मौत की सजा हो सकती है , से मैं सहमत हूँ .
किसी का पीछा करने को भी जुर्म माना गया है और इसके लिए अधिकतम सात साल की सजा मुक्कर्रर की गई है. यह भी बिलकुल सही है. किसी को किसी की पीछा करने का कोई अधिकार नहीं है और होना भी नहीं चाहिए.
हमारे देश के कानून में जुर्म की सजा आर्थिक दंड / जेल / मौत है. जब जेल जाना एक सजा है तो किसी को झूठे आरोप में जेल भिजवाना भी एक "जुर्म" होना चाहिए.यदि किसी पर बलात्कार जैसा जघन्य और घृणित आरोप लगता है तो उस व्यक्ति को पुलिस अपने हिरासत में ले लेती है और अक्सर आरोपी को जेल भेज दिया जाता है. यदि यह आरोप बाद में गलत निकलता है तो माननीय न्यायालय द्वारा उस व्यक्ति को आरोपमुक्त घोषित किया जाता है और यदि वह जेल में है तो जेल से रिहाई का आदेश दे दिया जाता है. बाद में वह व्यक्ति यदि चाहे तो मानहानि का मुकदमा न्यायालय में दर्ज कर सकता है. उस मानहानि पर न्यायालय तय करेगी की पुरुष (पुरुष लिखने का तात्पर्य यह है की सामान्यतः महिला ही पुरुष पर बलात्कार का आरोप लगाती है) के इज्जत का कितना आकलन होना चाहिए ?
मैं उस पुरुष के मनोस्थिति के बारे में सोचना चाहता हूँ जिसपर कोई बलात्कार का झूठा आरोप हो और वो जेल में हो. उसके लिए जेल जाना भी एक मानसिक बलात्कार ही तो है. वहां उसकी सारी स्वतंत्रता खत्म हो जाती है. वह व्यक्ति वहां बार-बार मरता है. जब भी कभी समाज की बात उसके दिमाग में आती होगी तो वह जरुर सोचता होगा की न्यायालय से तो उसे आरोप से मुक्ति मिल ही जाएगी मगर क्या समाज में फिर से वही इज्जत ,वही सम्मान, वही प्रतिष्ठा मिलेगी ?? इस तरह की मानसिक पीड़ा और बलात्कार से वह व्यक्ति जूझता रहता है. किसी महिला का बलात्कार जो की संभवतः आधे घंटे में पूरा हो जाता होगा उससे कई गुणा ज्यादा समय तक उस पुरुष का जेल में मानसिक बलात्कार होता है.
यदि बलात्कार का आरोप झूठा साबित होता है तो जिस व्यक्ति (महिला/पुरुष) ने किसी पर बलात्कार का झूठा आरोप लगाया है उसके लिए भी क्यूँ नहीं एक निश्चित सजा मुकर्कर की गई ?? झूठा बलात्कार का आरोप लगाना भी बलात्कार करने जैसा ही एक जुर्म माना जाना चाहिए. झूठा बलात्कार का आरोप लगाने वाले/वाली को भी क्यूँ नहीं आजीवन कारावास हो या क्यूँ नहीं उसे भी मौत की सजा सुनाई जाए और यह सजा उस निर्दोष व्यक्ति के मानहानि के आरोप लगाने पर नहीं बल्कि कानून में ही होना चाहिए की यदि बलात्कार का आरोप झूठा साबित हुआ तो आरोप लगाने वाले/वाली व्यक्ति को भी पता चलना चाहिए की झूठा बलात्कार का आरोप भी बलात्कार के जैसा ही एक जुर्म है.
यह लेखक का अपना स्वतंत्र मत है.
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