मेरा मन न जाने कहाँ खो रहा था
ऐसा लगा कि मै अचानक सो रहा था
फिर संचार हुआ एक शक्ति का
मन में भाव आया एक भक्ति का
ऐसा लगा जैसे कि कोई कह रहा हो
और मेरे ही साथ जैसे रह रहा वो
कहता है, तुम मानव हो
तुम ही हो मेरे विशिष्ट कृति
तुम्हारी अनुपम है प्रकृति
फिर क्यों ये खेल खेला जा रहा है
मानव से मानव को तौला जा रहा है
मैंने तो सबको बनाया था समान
फिर क्यों होता है किसी का अपमान
मानवता सब जगह हो रहा है खंडित
निर्दोष क्यों हो रहे हैं दण्डित
अपनी मर्यादा का कुछ तो भान करो
मेरे इस कृति का कुछ तो सम्मान करो
बंद करो यह लूट-पाट
बंद करो यह जात-पात
बंद करो यह रंग-भेद
बंद करो यह लिंग-बिभेद
इतना कह कर वो हुए गंभीर
और मैं फिर हो गया अधीर
अगले ही पल वे विलीन
मेरा ही तेज कुछ हुआ मलीन
ऐसा लगा कि कोई झकझोर गया है
लगा अपनी भुजा का मुझ पर जोर गया है
मैं हो गया पुनः कुछ अशांत
और मन भी हो गया कुछ अधिक क्लांत...
ऐसा लगा कि मै अचानक सो रहा था
फिर संचार हुआ एक शक्ति का
मन में भाव आया एक भक्ति का
ऐसा लगा जैसे कि कोई कह रहा हो
और मेरे ही साथ जैसे रह रहा वो
कहता है, तुम मानव हो
तुम ही हो मेरे विशिष्ट कृति
तुम्हारी अनुपम है प्रकृति
फिर क्यों ये खेल खेला जा रहा है
मानव से मानव को तौला जा रहा है
मैंने तो सबको बनाया था समान
फिर क्यों होता है किसी का अपमान
मानवता सब जगह हो रहा है खंडित
निर्दोष क्यों हो रहे हैं दण्डित
अपनी मर्यादा का कुछ तो भान करो
मेरे इस कृति का कुछ तो सम्मान करो
बंद करो यह लूट-पाट
बंद करो यह जात-पात
बंद करो यह रंग-भेद
बंद करो यह लिंग-बिभेद
इतना कह कर वो हुए गंभीर
और मैं फिर हो गया अधीर
अगले ही पल वे विलीन
मेरा ही तेज कुछ हुआ मलीन
ऐसा लगा कि कोई झकझोर गया है
लगा अपनी भुजा का मुझ पर जोर गया है
मैं हो गया पुनः कुछ अशांत
और मन भी हो गया कुछ अधिक क्लांत...
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