Saturday, 20 July 2013

परिवर्तन... सही या गलत

जग बदला , मन बदला , बदला जमाना कुछ ऐसा
नकली सोने को भी कहे, लगता है यह असली जैसा
लोग कहे पुरानी सभ्यता को , है यह कैसा पिछड़े जैसा
पुरानी संस्कृति के संस्कृत को , कहता है यह पिछड़े जैसा

सभ्यता गोरों का है इनके लिए आदर्श
नहीं चाहिये इनको किसी सभ्य बुजुर्ग का परामर्श
कहते हैं बदलते समय में हो रहा इनका उत्कर्ष
व्यवशायिक जिंदगी में ये तो हैं बहुत दुर्घर्ष

जिंदगी के ख्याल में है इनका अपना स्वछन्द विचार
पुरानी सभ्यताओं का बोझ इनको लगता है अत्याचार
धार्मिक स्वतंत्रता का जग में करना है इनको प्रचार
जात-पात और धर्म से उपर उठकर इनका है अपना विचार

संतुष्टि हो तन की या संतुष्टि हो मन की
संतुष्टि हो अपनेपन की या संतुष्टि हो धन की
नहीं चाहिये कोई बंदिश अपने उपर इनको
अन्यथा हो जाएगी रंजिश आपके उपर इनको

कहते हैं मिलाना है इनको एक-दुसरे का रसायन
तभी हो सकता है इनका जाकर कहीं पाणी-ग्रहण
मिलाना है इनको एक-दुसरे के सोच की आवृति
नहीं चाहिये इनको किसी पुराने प्रथा की पुनरावृति...

No comments:

Post a Comment

Note: only a member of this blog may post a comment.