Sunday, 24 November 2013

डायरी लेखन

डायरी लिखने की प्रथा बहुत पुरानी है.  लेखक डायरी में अपनी दिनचर्या और आत्मकथा लिखते हैं. अपनी डायरी, अपना व्यक्तित्व और अपना ही आकलन। डायरी लिखने से लेखक का मन हल्का हो जाता है और उसे शांति मिलती है.  डायरी लिखने से स्मरण शक्ति बढती है और लेखन क्षमता में भी दक्षता आती है. स्मरण शक्ति का तात्पर्य यह है की जिस घटना या दृश्य के बारे में आप लिखना चाहते हैं वह आपको कितना याद है ? यदि पूरा याद हो तो फिर उस घटना या दृश्य के बारे में आप सब कुछ लिख सकते हैं और अगर याद नहीं हो तो फिर डायरी में जो भी लिखेंगे वह पूर्ण सत्य नहीं होगा। लेखक किसी भी दृश्य या घटना को कितने बारीकी से देखता है और उसका मूल्यांकन किस तरह करता है यह उसके डायरी लेखन से परिलक्षित होता है.  डायरी में लेखक अपनी जीवन यात्रा को कलमबद्ध कर सुरक्षित रख सकता है. अपने जीवन के कडवाहटों तथा मधुर संबंधों को अपने ही शब्दों में पिरोकर लेखक हरेक सम्बन्ध को जीवित रख सकता है. अपनी संवेदना व्यक्त करने का एक बहुत ही अच्छा माध्यम है डायरी। लेखक डायरी में अपनी गलतियों के बारे में भी लिखता है. वह  क्षण हमेशा के लिए कैद हो जाता है जब मनुष्य खुद गलती करता है और उसे उस गलती का एहसास भी होता है जो की वह डायरी के माध्यम से जीवित रखना चाहता है. बहुत लोग गलती के पश्चाताप के बारे में भी लिखते हैं। गलती मानकर उसका उचित पश्चाताप भी लेखक के जीवन दर्शन के बारे में बताता है. डायरी में लिखे अपनी गलतियों को साक्षी मानकर यह प्रतिज्ञां करता है की उन गलतियों की पुनरावृति नहीं होगी। लेखक द्वारा लिखे गए डायरी के पढने से उसके व्यक्तित्व और जीवन दर्शन के बारे में पता चलता है. लेखक का मूल्याङ्कन पाठक के बौद्धिक क्षमता पर भी निर्भर करता है. एक डायरी यदि अलग-अलग विचारधारा के पाठक पढेंगे तो वो लेखक का मूल्याङ्कन भी एक जैसा नहीं कर पायेंगें। 
डायरी लेखक की निजी संपत्ति होती है. डायरी यदि सार्वजानिक हो जाए तो लेखक की कमजोरी बन सकती है. खुद अपनी गलतियों को दूसरों के सामने बताना अपने पैर पर कुल्हाड़ी मारने के जैसा है. यदि लेखक किसी संगीन घटना का प्रत्यक्ष द्रष्टा हो और उसका उल्लेख यदि डायरी में हो तो वह उसके लिए पीड़ादायक हो सकता है. पूर्वजों की डायरी पढने से परिवार तथा समाज में द्वेष की भावना भी उत्पन्न हो सकती है. एक गलत चीज़ को एक डायरी के माध्यम से यदि कोई बुजुर्ग सही ठहराते हैं  तो उसकी अगली पीढ़ी उस चीज़ को सही मानकर फिर से वही गलती कर सकती है. एक पक्षपातपूर्ण लिखा हुआ डायरी उतना ही विध्वंशक हो सकता है जितना की पक्षपातपूर्ण लिखा हुआ इतिहास।   

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