अपनी महफ़िल में मुझे बुलाओ तेरी रुसवाई कम हो जायेगी
जो तुम मुझसे करो गुफ़तगू तो तेरी तन्हाई कम हो जायेगी
तेरी महफ़िल में ज़माने भर का ग़म था तुम्हारा अपना भी ग़म था
मगर जो बरपा रही थी तुम औरों पर बताओ वो कैसा सितम था
यूँ तो तुम्हारे कई चाहने वाले होंगे जो सराहेंगे भी निबाहेंगे भी
गर जो हो वफ़ा की बातें तो तुझे लोग झुठलाएंगे भी भुलायेंगे भी
दूर आसमां में कभी अमावस में एक रात महताब उतरा था
बाद मेरे ज़हन में कितना दर्द उतरा था कैसा ख्वाब उतरा था
जो तुझको देखूं तो हुस्न परेशां दीखता है इश्क़ बे-निशां दीखता है
तेरी महफ़िल में "धरम" न मैं दीखता हूँ न मेरा नक़्शे-पां दीखता है
जो तुम मुझसे करो गुफ़तगू तो तेरी तन्हाई कम हो जायेगी
तेरी महफ़िल में ज़माने भर का ग़म था तुम्हारा अपना भी ग़म था
मगर जो बरपा रही थी तुम औरों पर बताओ वो कैसा सितम था
यूँ तो तुम्हारे कई चाहने वाले होंगे जो सराहेंगे भी निबाहेंगे भी
गर जो हो वफ़ा की बातें तो तुझे लोग झुठलाएंगे भी भुलायेंगे भी
दूर आसमां में कभी अमावस में एक रात महताब उतरा था
बाद मेरे ज़हन में कितना दर्द उतरा था कैसा ख्वाब उतरा था
जो तुझको देखूं तो हुस्न परेशां दीखता है इश्क़ बे-निशां दीखता है
तेरी महफ़िल में "धरम" न मैं दीखता हूँ न मेरा नक़्शे-पां दीखता है
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