Saturday, 23 May 2015

चंद शेर

1.

मैं अपने हाथों में अभी ज़हर जा जाम लिए बैठा हूँ
ऐ! मौत ठहर जा मैं गर्दिश-ए-अय्याम लिए बैठा हूँ

2.

ये उसके बेरुखी का जायका है मेरे गले से तो उतरता ही नहीं
दिल अभी पूरी तरह से गला नहीं ज़ख्म पूरा दीखता ही नहीं

3.

माशूक़ का जिस्म जलेगा तो तुम्हारा दिल रौशन होगा
तुम्हारे दिल-ए-रौशन का राज़ ज़माने को बता दी जाये  

4.

तुम मुझे अपने पिन्दार-ए-संग की दुहाई न दे "धरम"
मेरा हिज़्र ही बेहतर है डेरे दर्द-ए-दिल की दवा के लिए

5.

हम कब दो जिस्म एक जान थे हमारे सारे रिश्ते "धरम" बेजान थे
वो बस एक झूठी मोहब्बत थी औ" ज़माने में हम मुफ्त बदनाम थे 

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