ज़ख्म कल भी ताजा था औ" आज भी ताजा है
ऐ मौला मेरे साथ वक़्त का ये कैसा तकाजा है
इतनी बड़ी दुनियाँ है यहाँ रोज हज़ारों मरते हैं
मगर मुझे दिखता हर रोज एक ही जनाज़ा है
ऐ मौला मेरे साथ वक़्त का ये कैसा तकाजा है
इतनी बड़ी दुनियाँ है यहाँ रोज हज़ारों मरते हैं
मगर मुझे दिखता हर रोज एक ही जनाज़ा है
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