Thursday, 11 June 2015

अपना जिस्म माप लो

तुम अपने सारे ख्वाब समेट कर मेरे पहलू में रख लो
औ" मेरे साने पे सर रख कर मुझे बाहों में भर लो

ज़माना जरूर हैरत से देखेगा हम दोनों को मगर
बहुत मुख़्तसर ज़िंदगी है इसे मोहब्बत से जी लो  

ठंढी हवा के थपेड़ों में गर्म साँसों की मिलन होगी
औ" दो जिस्म एक हो जाएँगे ऐसी ज़िंदगी जी लो

ज़माना तो जिस्म का मुरीद है मगर मैंने तुझे चाहा
आ के मेरी जाँ कर आलिंगन एक दूसरे के होंठ पी लो

तुमने हमेशा जिस्म में उतरकर मोहब्बत मापी है "धरम"
आज मेरे मोहब्बत में उतरकर तुम अपना जिस्म माप लो 

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