Thursday, 12 May 2016

चंद शेर


1.
उसे पाकर भी न चैन मिला औ" खोकर भी न क़रार आया
कि हर हाल में "धरम" मेरे ज़ख्म-ए-दिल पर निखार आया

2.
दिल कि खनक के आगे अब यहाँ फींका है हर साज़
जब से जज़्बातों ने "धरम" पलकों को दे दी आवाज़

3.
आज़ादी कि चाह ने इसको बना दिया कैसा कपूत
अब तो ये लगता है "धरम" जैसे हो कोई ज़िंदा भूत

4.
फ़ाक़ा मस्ती है औ" हैं हम अपने सल्तनत के सरताज
कि जूता रखते हैं सर पर "धरम" पैरों तले रखते हैं ताज

5.
जब भी मुस्कुराने का दिल किया गैरों के ताने याद कर लिए
हमने अपने मुफलिसी के "धरम" सारे ज़माने याद कर लिए

6.
मोहब्बत कि आखिरी रश्म वो अता कर गया
ज़िंदा लाश को "धरम" कफन ओढ़ा कर गया

7.
ऐ! ज़िंदगी तू मुझे मिली "धरम" ज़िंदगी के बाद
अब क्या तेरी बंदगी करूँ ता-उम्र रिंदगी के बाद

8.
ऐ! आसमाँ अब तू ही बरसा गुलफ़ाम की गला तर जाए
फिर तबियत में छाये कुछ खुमारी औ" चेहरा निखर जाए

9.
हुस्न को इश्क़ ने "धरम" कुछ यूँ नज़राना दे दिया
कि क़लम कर खुद अपना सर सारा ज़माना दे दिया

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