1.
जिसे चिलमन के पीछे रहना था उसकी खूब नुमाईश हो रही है
अब तो ज़माने को "धरम" न जाने कैसी-कैसी ख्वाइश हो रही है
2.
अब की जो लगी प्यास तो बदन के शराब से ही बुझेगी
जिस्म की आग है "धरम" जिस्म की आग से ही बुझेगी
3.
अब जाकर पता चला तेरे इश्क़ का रंग है स्याह
तुझे तो "धरम" जहन्नुम में भी न मिले पनाह
4.
कभी मुझपे तो कभी ज़माने पे "धरम" तुको हँसी आई
मुझे ये बात अच्छी लगी की तुमको कभी तो ख़ुशी आई
5.
कोई भी दावत-ए-सुखन कम है तेरे नज़र उठाने के बाद
महफ़िल में अब कौन रुकता है "धरम" तेरे जाने के बाद
6.
लब उदास है "धरम" औ" हैं चेहरे पर झुर्रियां
इस नेकी की सजा मुझे कुछ इस तरह मिली
7.
सिवा तेरे इस नफरत की आग को हवा कौन दे सकता है
कि बाद मरने के भी "धरम" मुझे सजा कौन दे सकता है
8.
उदासी इस क़दर उसके चेहरे पर घर कर गई "धरम"
कि कोई भी फूल उसके दामन में अब महकता नहीं
9.
उसके बज़्म में "धरम" अब कोई पैमाना छलकता नहीं
कि ज़िक्र-ए-यार पर भी अब उसका दिल बहकता नहीं
10.
तेरे नामुराद इश्क़ के खातिर हम ता-उम्र बस जलते रहे
बेवाक यूँ हुए "धरम" कि दुश्मनों से ही गले मिलते रहे
11.
ग़र हम तेरे न हुए "धरम" तो ज़माने में किसी के न हुए
फासलों को अब मुद्दत हो गया मगर किस्से पुराने न हुए
No comments:
Post a Comment
Note: only a member of this blog may post a comment.