Friday, 26 May 2017

पथिक हो तुम

पथिक हो तुम
और मैं तो बस एक पड़ाव था
तुम्हारे जीवन काल के रास्ते का
शायद बीच का ही कोई हिस्सा कह लो तुम
मैं अपने से पिछले पड़ाव को जानता हूँ
जहाँ तुम कभी ठहरी थी ठंढी सांस ली थी
और साथ में ज़िंदगी के चंद यादगार लम्हें भी

पथिक हो तुम
एक ही पड़ाव पर पूरी ज़िंदगी बिताना
तुम्हारे रूचि का नहीं
हाँ! तुम्हारे लिए
जीवन के यात्रा में बदलाव जरूर है
तुम्हारे कदम आगे बढ़े
अब तुम अगले पड़ाव पर थी
और तुम्हारा वो पड़ाव मैं था
मैंने स्वागत किया तुम्हारा
हाँ! मगर जब भी
पिछले पड़ाव का ख़्याल आता था
मेरा मन दुखता था
मुझे ऐसा लगता था की मैंने
पिछले पड़ाव से उसका पथिक छीन लिया
ये ज़द्दोज़हद मुझे बहुत दिनों तक कौंधता रहा
मगर मैं भी तो एक पड़ाव ही था
एक पड़ाव दूसरे पड़ाव से पथिक कैसे छीन सकता है
पड़ाव स्थिर है और पथिक चलायमान
यह बात मुझे तस्सली देती थी
बाद इसके
हाँ ख़ुशी इस बात की थी
की मेरे पड़ाव पर एक पथिक का
चंद दिनों के लिए ठहराव था

पथिक हो तुम
तुझमे बदलाव को भाफने इल्म है
और बाद चंद दिनों के
तुमने खुद मुझमें बदलाव देखा था
तुम्हारे लिए मुझ पड़ाव पर के
सारे फूल सुगंध विहीन हो गए थे
सारे दरख्ते छाहँ विहीन हो गए थे
सारे पक्षी सुर विहीन हो गए थे
निर्मल जल अब पीने लायक नहीं था
बूढ़े दरख़्तों के फल सड़ने लगे थे
इतने बदलाव महशूस करने के बाद
तुमने मुझ पड़ाव का त्याग कर
और कदम अगले पड़ाव के लिए बढ़ा दिया

पथिक हो तुम
तुझमे पड़ाव के दर्द को महशूस करने की आदत नहीं
पड़ाव का दर्द तुम्हारे जीवन के गति को रोक देगा
और तुम हमेशा "कुछ नया" का अनुभव नहीं कर पाओगी

पथिक हो तुम
मैं तुम्हारे अगले पड़ाव को पहचानता हूँ
आत्मविश्वास के साथ यह नहीं कह सकता
की उसको अच्छी तरह से जानता हूँ
हाँ मगर वह पड़ाव तुम्हें अभी आनंद जरूर देगा
निश्चित ही तुम "कुछ नया" का अनुभव कर पाओगी
मुझे पता है पथिक स्वभावबस चलायमान होता है
जिस दिन मेरे से अगले पड़ाव पर तुमको
मुझ जैसा पड़ाव का ही अनुभव होने लगेगा
तुम्हारे कदम फिर से उसके अगले पड़ाव की ओर चल पड़ेंगे
तुम्हारे ज़िंदगी का रास्ता बहुत लम्बा है
और इसमें ढेर सारे पड़ाव भी आएंगे
तुम स्वभावबस एक के बाद एक पड़ाव को
पीछे छोड़ते हुए अपने जीवन में आगे बढ़ते जाओगी

हाँ! वास्तव में एक पथिक हो तुम 

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