1.
हमने ढ़ेर सारे ज़ख्मों को 'धरम' नासूर बनते देखा है
एक तरफ़ा प्यार में बिना बात के हुज़ूर बनते देखा है
2.
ये मेरे तस्सबुर के चाँद के टुकड़े हैं कि तू आ तुझे इसमें लपेट दूँ
तेरे इस बेपनाह हुस्न को 'धरम' मैं अपने हाथों से चाँद में समेट दूँ
3.
मुझे चाहने वाले भी कुछ लोग हैं "धरम" जिसके लिए ज़िंदा हूँ मैं
मगर तेरी नज़र में तो बस क्या कहूँ भटकता हुआ एक रिंदा हूँ मैं
4.
कि मेरी उड़ान तेरी ज़िंदगी की उड़ान से कुछ कम तो न थी
मगर फिर भी तेरे लिए तो महज बिना पंख का परिंदा हूँ मैं
हमने ढ़ेर सारे ज़ख्मों को 'धरम' नासूर बनते देखा है
एक तरफ़ा प्यार में बिना बात के हुज़ूर बनते देखा है
2.
ये मेरे तस्सबुर के चाँद के टुकड़े हैं कि तू आ तुझे इसमें लपेट दूँ
तेरे इस बेपनाह हुस्न को 'धरम' मैं अपने हाथों से चाँद में समेट दूँ
3.
मुझे चाहने वाले भी कुछ लोग हैं "धरम" जिसके लिए ज़िंदा हूँ मैं
मगर तेरी नज़र में तो बस क्या कहूँ भटकता हुआ एक रिंदा हूँ मैं
4.
कि मेरी उड़ान तेरी ज़िंदगी की उड़ान से कुछ कम तो न थी
मगर फिर भी तेरे लिए तो महज बिना पंख का परिंदा हूँ मैं
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