क्या हुआ कि सितारों ने चमकना छोड़ दिया
चाँदनी मुरझाई सूरज ने दमकना छोड़ दिया
चाँदनी मुरझाई सूरज ने दमकना छोड़ दिया
मक्कारी, फ़रेबी, बे-ईमानी बातें कैसी भी हो
इन बातों को कहने में झिझकना छोड़ दिया
साक़ी का क़हर हो कि हो रिन्दों की बे-सब्री
ऐसी बातों पर साग़र ने छलकना छोड़ दिया
मंज़र ज़ुल्म-ओ-सितम का हो या 'उरूज का
अंदर किसी भी आग ने दहकना छोड़ दिया
बाद चैन-ओ-सुकूँ के भी आँखों में नींद नहीं
थकन में पलकों ने भी झपकना छोड़ दिया
आँखों में न अश्क़ रहा न ही लहू रहा 'धरम'
तन्हाई में साँसों ने भी सिसकना छोड़ दिया