जो आँख खुलती है तो बजने लगती है तन्हाई
फूल झड़ जाते हैं कलियाँ लगती है झुलसाई
आँखें जब मिलती है नज़र लगती है मुरझाई
दरमियाँ दोनों के कि बातें लगती है बिसराई
जाने किस बात पर चिड़िया लगती है इतराई
शाख को बैठी चिड़िया बस लगती है भरपाई
पहले-पहल पायल उसी ने लगती है झनकाई
कि उसने जो कही वो बातें लगती है दोहराई
वो पुरानी यादें उसकी अब लगती है दफ़नाई
कि ख़याल आने पर साँसें लगती है अकुलाई
लो उसने कह दी दोनों में लगती है आशनाई
'धरम' जिसकी बातें सबको लगती है भरमाई
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