Saturday, 8 March 2025

सवालों के घेरे में रहा है

उसका हरेक जवाब सवालों के घेरे में रहा है 
उसे ख़बर न थी कि वो ख़ुद भी अँधेरे रहा है

वहाँ बज़्म में सिर्फ़ इस बात की ही चर्चा रही  
कैसे मुफ़लिस के घर ख़ुर्शीद सवेरे में रहा है

दरमियान दोनों के फ़ासला  आसमाँ जितना 
तो फिर लहज़ा  क्यूँ हमेशा तेरे-मेरे में रहा है

तेरे दर से जब निकला  एक बेचैनी बनी रही  
दिल में सुकूँ रहा जब भी तेरे बसेरे में रहा है

सूरत उसकी याद है या भूल गया  पता नहीं 
कि चेहरे पर अँधेरा हर वक़्त घनेरे में रहा है

बज़्म में जाने से पहले ख़ुद को तौलना 'धरम'
ये इश्क़ भी एक खेल है साँप-सपेरे में रहा है

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