धुंध की आढ़ में अपने घर से निकल लेगा
वापस आएगा तो पता अपना बदल लेगा
रिश्ते में नाराज़गी ऐसी कि ग़र बिछड़ें तो
साथ जिस्म के ख़ुद ही दिल भी चल लेगा
सितारे महफ़िल में अब उदास रहने लगे
कैसे यक़ीं करें कि दिल ख़ुद बहल लेगा
तबी'अत को अब तो कुछ भी भाता नहीं
बहार को ये यक़ीं है कि मन मचल लेगा
रूहानी बातें भी दिल तक पहुँच न पाई
ऐसा क्या करें जिसपर वो 'अमल लेगा
मुझे इस बात पर बिल्कुल यकीं "धरम"
वो क़त्ल करेगा औ" ख़ंज़र निगल लेगा