Thursday, 27 December 2012

"मूड आई "


आई आई टी बॉम्बे का "कल्चरल फेस्ट "
जी हाँ  यह "मूड इंडिगो "  है
किस "कल्चर" का "फेस्ट" है यह
मुझे पता ही नहीं चल पाया
और पता चले भी तो  कैसे
पहले कभी ऐसा देखा भी न था

कई तरह की  सुंदरियों के हुजूम थे
कुछ "मिनी स्कर्ट्स " में तो
कुछ "माइक्रो स्कर्ट्स " में थे
मेरे एक साथी ने कहा
अब तो नेनो का ज़माना है

अपने जीवन में इतनी सारी सुंदरियाँ
और वो भी  इतने कम कपडे में  
जी हाँ .. मैंने आज तक न देखा था

देशी बोल और उस पर बिदेशी धुन
शायद गधा भी इतना बेसुरा न हो
सिर्फ इतना ही नहीं
उस धुन पर लोगों का बेवाक हो जाना
कभी उछलना कभी झूमना
और कभी "यो - यो " करना
और भी कई तरह की हरकतें

षोडशी बालाओं का तो कुछ कहना ही नहीं
"फेविकोल" से चिपकने वाले गाने को
पूर्ण रूपेण चरितार्थ करते हुए
सबों का मनोरंजन कर रही थी


सुना था आई आई टी बॉम्बे का
"एक्सपोजर" बहुत अच्छा है
जो अब कुछ दिख भी रहा है
जी हाँ , दो साल मैंने
आई आई टी खड़गपुर में भी बिताया
"एक्सपोजर" वहां  भी था मगर
 वाकई बॉम्बे के जितना न था


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