Saturday, 8 December 2012

तुम सिकंदर हो


मुकद्दर का फैसला है
तुम्हें मानना ही पड़ेगा
तुम सिकंदर हो
तुम्हें जीतना ही पड़ेगा

तुम क्यूँ फंस रहे हो कतरे में
जब दरिया खड़ा है तेरे दीदार के लिए
भुला दो, वो कल की बातें थी
देखो समंदर लहरा रहा है तेरे इंतज़ार में  

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