जज्बात की लाठी का खटखट
और फिर उसके आने की आहट
मानो ठंढी हवा का बदन से लिपटना
और फिर वो सिहरन जो सुकूँ देता हो
ख़ामोशी की जुबां
मानो कह रहा हो
लिपट कर चूम लो मुझको
सलोनी चेहरे की ख़ुशी
नज़र का थोड़ा झुकना
फिर यूँ ही कुछ बुदबुदाना
मानो कुछ कहना भी
और कुछ ना कहना भी
उसके हाथ पर अपना हाथ रखना
उसके कंधे पर अपना सिर रखना
ठंढी सासें लेना
और फिर खो जाना
दूर कहीं सितारों में
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