जब तलक फ़कीरी मेरे साथ है
किसी ग़म का न मुझे एह्शास है
मुफलिसी दूर रहती है मुझसे
अमीरी से मेरा कोई वास्ता नहीं
चेहरे पर अब कोई फ़िक्र नहीं है
ग़म का भी कोई जिक्र नहीं है
मैं यूँ ही जमीं पर लेट जाता हूँ
आसमां के तारे गिनता रहता हूँ
किसी ग़म का न मुझे एह्शास है
मुफलिसी दूर रहती है मुझसे
अमीरी से मेरा कोई वास्ता नहीं
चेहरे पर अब कोई फ़िक्र नहीं है
ग़म का भी कोई जिक्र नहीं है
मैं यूँ ही जमीं पर लेट जाता हूँ
आसमां के तारे गिनता रहता हूँ
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