इसे रहने दो ये पुराना ज़ख्म है इसे कुरेदा नहीं करते
दिल को टुकड़ों में बिखेरकर फिर से जोड़ा नहीं करते
तेरे दरिया-ए-हुस्न से मैं हर बार तिश्नकाम लौटा हूँ
उसकी नुमाइश करके मेरी प्यास बढ़ाया नहीं करते
फूल में काँटे पिरोने का इल्म तुमने बहुत खूब सीखा है
बस चुभोकर सीने में कील दूसरों को तड़पाया नहीं करते
अपने सीने के लहू का तुम भरे बाज़ार मोल-भाव करते हो
हम तो वो हैं "धरम" जो अपना ज़ख्म दिखाया नहीं करते
दिल को टुकड़ों में बिखेरकर फिर से जोड़ा नहीं करते
तेरे दरिया-ए-हुस्न से मैं हर बार तिश्नकाम लौटा हूँ
उसकी नुमाइश करके मेरी प्यास बढ़ाया नहीं करते
फूल में काँटे पिरोने का इल्म तुमने बहुत खूब सीखा है
बस चुभोकर सीने में कील दूसरों को तड़पाया नहीं करते
अपने सीने के लहू का तुम भरे बाज़ार मोल-भाव करते हो
हम तो वो हैं "धरम" जो अपना ज़ख्म दिखाया नहीं करते
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