Thursday, 26 February 2015

हुंकार

करतब करता बोल गया सिंघासन फिर से डोलेगा
जिसको तू मुर्दा समझे है वो अब फिर से बोलेगा

है नाद समय का सुन ले तुम पग अब तो तेरा उखड़ेगा
हर ओर उठेगा हाहाकार विकराल काल मुख खोलेगा  



Wednesday, 25 February 2015

बीते अब ज़माना हो गया

मेरी मोहब्बत का किस्सा पुराना हो गया
जो अपना था वो कब का बेगाना हो गया

निगाहें मिलती थी आखों से पी लेता था
इन बातों को बीते अब ज़माना हो गया

इश्क़ दो रूहों का मिलन हुआ करता था कभी  
मोहब्बत का अब तो अलग पैमाना हो गया

जो कभी दिल में झांककर देखा करता था
वो अब तो पैसा देखकर दीवाना हो गया

देकर बाँहों में बाहें जो कभी घूमा करता था
आज मिला तो बस उलटे पांव रवाना हो गया

जहाँ हर रोज प्यार का मौसम हुआ करता था
वो बुलंद ईमारत तो कब का वीराना हो गया

उसके दिल को जब कुरेद कर देखा "धरम"
पता चला वहां तो अब कब्रखाना हो गया 

Monday, 23 February 2015

वो तेरा मेरा ख्वाब ...

आओ दोनों मिलकर अपने सपनों को रंग दें
तुम मेरे ख्वाब सजा दो और मैं तेरे सँवार दूँ
लिखकर दिलपर नाम तुम मुझे निखार दो
देकर गलबाहीं मुझे तुम भरपूर प्यार दो

बिना मेरे तुम और बिना तुम मेरे बस शून्य है
अकेले-अकेले में किसी का कोई वज़ूद नहीं है
मिलन सिर्फ दो जिस्मों तक सिमट नहीं सकता
दो रूहों का एकाकार होता है यह अद्भुत मिलन
कितना प्राकृतिक कितना आनंददायक कितना सुन्दर

इस रिश्ते में गिरह का कोई वज़ूद नहीं है
बस प्रेम का लेन-देन है कोई मूल-सूद नहीं है
हाँ मगर ये रिश्ता मुकम्मल तब होगा
जब अपने अक्स में मैं तुम्हारा चेहरा ढूंढ लूंगा

जीवन की सीढ़ी पर कदम साथ-साथ चलेंगे
न कभी तुम आगे होगे न कभी मैं पीछे होऊंगा
मंज़िल पर भी कदम साथ ही पड़ेंगे

तुम्हारी सफलता मुझसे कहाँ भिन्न है
सीढ़ी एक ही है रास्ता भी एक ही है
दूर चमकता सूरज भी तो एक ही है

जो हम साथ है तो मिलकर उठेंगे हाथ चार
मगर उन्नति के पथ पर होंगे सिर्फ एक विचार
मिलकर सहेंगे दृढ कदम कर हर प्रहार
तुम मुझसे कर और मैं तुझसे करूँ यह करार

तेरे जीवन का जो रूखापन है उसे मैं अब पी लेता हूँ
ये बहुत कड़वा स्वाद है मगर फिर भी जी लेता हूँ
इरादा अटल है अब दुखों का समंदर लाँघ ही लूंगा
बांध समंदर पर एकबार फिर बांध ही लूंगा

मेरे सपनो के आँगन में नाचता है तेरा ख्वाब
लुटाता है मुझपर वह खुशियां बेहिसाब
हर रोज मिलने का अंदाज़ होता है नायाब
मगर जब भी मिलता है तो मिलता है बेहिजाब

वो तेरा मेरा ख्वाब ...

Saturday, 21 February 2015

सुपुर्द-ए-ख़ाक कर गया

वक़्त दिल में अनगिनत सुराख़ कर गया
इंसानियत के रिश्ते को नापाक कर गया

हरेक अरमाँ को जलाकर राख कर गया
औ" मेरे रूह को सुपुर्द-ए-ख़ाक कर गया

मुझसे दिल भर गया तो इख़्लाक़ कर गया
खुद भी रोया और मुझे भी बेवाक कर गया


Tuesday, 17 February 2015

दर्द छुपाए बैठा हूँ

तेरे उम्मीद से ज्यादा मैं दर्द छुपाए बैठा हूँ
खुद अपने सीने में अपना दिल दबाए बैठा हूँ

तुमने जो मेरे जिस्म के कई टुकड़े किये थे
अपने ज़िस्म का वो हरेक टुकड़ा लुटाए बैठा हूँ

तेरे ज़ख्मों से जो लहू का दरिया निकल आया था
वो आखों का लहू तिश्नकामों को पिलाए बैठा हूँ

Saturday, 14 February 2015

आहिस्ते से

कब दिल में दस्तक दे गया वो आहिस्ते से
अजनबी शहर में मिला था जिस फ़रिश्ते से

वीरानी अब दूर तक दिल में दिखती नहीं है
पता नहीं कब निकल गई वो किस रस्ते से

पहले कभी मिलता था तो नज़र चुरा लेता था
अब मिलता है तो सलाम करता है गुलदस्ते से

जो आँखें चार हुई तो दिल में उतारा भी गया
मिल गई मोहब्बत की मिल्कियत सस्ते से

ये मेरी मोहब्बत नहीं है तो और क्या है "धरम"
वो जो जा रहा था लौट के आ गया फिर रस्ते से 

Sunday, 8 February 2015

खुद एक सवाल हो गए

तेरे इश्क़ में न जाने कितने हलाल हो गए
जो बच गए थे वो ज़िंदगी से बेहाल हो गए

रुस्वाई इस कदर सर चढ़ कर बोलने लगी
पहले ही कदम पर गिरे और निढाल हो गए

तुझको पाने ही तमन्ना बस धरी ही रह गई
हाँ मगर तेरे ज़ख्म से हम मालामाल हो गए

दर औ' दीवार से मेरी सारी तस्वीर हटा दी गई
हम तो अब महज एक भूला सा ख्याल हो गए

अब न तो तुम दोस्त ठहरे न दुश्मनी ही रह गई
तुम ऐसे टूटे कि बेताल्लुक़ात के मिशाल हो गए

ज़माने के रिश्तों से "धरम" इतने बेफिक्र हो गए
कि अब खुद तुम अपने आप में एक सवाल हो गए

Wednesday, 4 February 2015

गिला अब भी है

दीवार गिरा दी गई है मगर वो फ़ासला अब भी है
जिस्म मिल रहे हैं मगर दिल में गिला अब भी है

Monday, 2 February 2015

चंद शेर

1.

अब खुद पे ज़ुल्म और तुमपे इन्साफ करता हूँ
तेरी मज़बूरी पर मैं अपना खून माफ़ करता हूँ

2.

अब तो हर रोज मरता हूँ और जी भी लेता हूँ
अपने सीने का लहू निकालता हूँ पी भी लेता हूँ

3.

इन्साफ के तराजू पर पलड़ा किसका भारी है
जिसका कद ऊँचा है तराजू उसका आभारी है

4.

तेरे अंदाज़-ए-मोहब्बत के तो हम कायल हो गए
तुमने ज़ख्म दिए भी नहीं औ" हम घायल हो गए