Monday, 2 February 2015

चंद शेर

1.

अब खुद पे ज़ुल्म और तुमपे इन्साफ करता हूँ
तेरी मज़बूरी पर मैं अपना खून माफ़ करता हूँ

2.

अब तो हर रोज मरता हूँ और जी भी लेता हूँ
अपने सीने का लहू निकालता हूँ पी भी लेता हूँ

3.

इन्साफ के तराजू पर पलड़ा किसका भारी है
जिसका कद ऊँचा है तराजू उसका आभारी है

4.

तेरे अंदाज़-ए-मोहब्बत के तो हम कायल हो गए
तुमने ज़ख्म दिए भी नहीं औ" हम घायल हो गए

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