Wednesday, 25 February 2015

बीते अब ज़माना हो गया

मेरी मोहब्बत का किस्सा पुराना हो गया
जो अपना था वो कब का बेगाना हो गया

निगाहें मिलती थी आखों से पी लेता था
इन बातों को बीते अब ज़माना हो गया

इश्क़ दो रूहों का मिलन हुआ करता था कभी  
मोहब्बत का अब तो अलग पैमाना हो गया

जो कभी दिल में झांककर देखा करता था
वो अब तो पैसा देखकर दीवाना हो गया

देकर बाँहों में बाहें जो कभी घूमा करता था
आज मिला तो बस उलटे पांव रवाना हो गया

जहाँ हर रोज प्यार का मौसम हुआ करता था
वो बुलंद ईमारत तो कब का वीराना हो गया

उसके दिल को जब कुरेद कर देखा "धरम"
पता चला वहां तो अब कब्रखाना हो गया 

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