कब दिल में दस्तक दे गया वो आहिस्ते से
अजनबी शहर में मिला था जिस फ़रिश्ते से
वीरानी अब दूर तक दिल में दिखती नहीं है
पता नहीं कब निकल गई वो किस रस्ते से
पहले कभी मिलता था तो नज़र चुरा लेता था
अब मिलता है तो सलाम करता है गुलदस्ते से
जो आँखें चार हुई तो दिल में उतारा भी गया
मिल गई मोहब्बत की मिल्कियत सस्ते से
अजनबी शहर में मिला था जिस फ़रिश्ते से
वीरानी अब दूर तक दिल में दिखती नहीं है
पता नहीं कब निकल गई वो किस रस्ते से
पहले कभी मिलता था तो नज़र चुरा लेता था
अब मिलता है तो सलाम करता है गुलदस्ते से
जो आँखें चार हुई तो दिल में उतारा भी गया
मिल गई मोहब्बत की मिल्कियत सस्ते से
ये मेरी मोहब्बत नहीं है तो और क्या है "धरम"
वो जो जा रहा था लौट के आ गया फिर रस्ते से
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