Monday, 23 February 2015

वो तेरा मेरा ख्वाब ...

आओ दोनों मिलकर अपने सपनों को रंग दें
तुम मेरे ख्वाब सजा दो और मैं तेरे सँवार दूँ
लिखकर दिलपर नाम तुम मुझे निखार दो
देकर गलबाहीं मुझे तुम भरपूर प्यार दो

बिना मेरे तुम और बिना तुम मेरे बस शून्य है
अकेले-अकेले में किसी का कोई वज़ूद नहीं है
मिलन सिर्फ दो जिस्मों तक सिमट नहीं सकता
दो रूहों का एकाकार होता है यह अद्भुत मिलन
कितना प्राकृतिक कितना आनंददायक कितना सुन्दर

इस रिश्ते में गिरह का कोई वज़ूद नहीं है
बस प्रेम का लेन-देन है कोई मूल-सूद नहीं है
हाँ मगर ये रिश्ता मुकम्मल तब होगा
जब अपने अक्स में मैं तुम्हारा चेहरा ढूंढ लूंगा

जीवन की सीढ़ी पर कदम साथ-साथ चलेंगे
न कभी तुम आगे होगे न कभी मैं पीछे होऊंगा
मंज़िल पर भी कदम साथ ही पड़ेंगे

तुम्हारी सफलता मुझसे कहाँ भिन्न है
सीढ़ी एक ही है रास्ता भी एक ही है
दूर चमकता सूरज भी तो एक ही है

जो हम साथ है तो मिलकर उठेंगे हाथ चार
मगर उन्नति के पथ पर होंगे सिर्फ एक विचार
मिलकर सहेंगे दृढ कदम कर हर प्रहार
तुम मुझसे कर और मैं तुझसे करूँ यह करार

तेरे जीवन का जो रूखापन है उसे मैं अब पी लेता हूँ
ये बहुत कड़वा स्वाद है मगर फिर भी जी लेता हूँ
इरादा अटल है अब दुखों का समंदर लाँघ ही लूंगा
बांध समंदर पर एकबार फिर बांध ही लूंगा

मेरे सपनो के आँगन में नाचता है तेरा ख्वाब
लुटाता है मुझपर वह खुशियां बेहिसाब
हर रोज मिलने का अंदाज़ होता है नायाब
मगर जब भी मिलता है तो मिलता है बेहिजाब

वो तेरा मेरा ख्वाब ...

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