वक़्त दिल में अनगिनत सुराख़ कर गया
इंसानियत के रिश्ते को नापाक कर गया
हरेक अरमाँ को जलाकर राख कर गया
औ" मेरे रूह को सुपुर्द-ए-ख़ाक कर गया
मुझसे दिल भर गया तो इख़्लाक़ कर गया
खुद भी रोया और मुझे भी बेवाक कर गया
इंसानियत के रिश्ते को नापाक कर गया
हरेक अरमाँ को जलाकर राख कर गया
औ" मेरे रूह को सुपुर्द-ए-ख़ाक कर गया
मुझसे दिल भर गया तो इख़्लाक़ कर गया
खुद भी रोया और मुझे भी बेवाक कर गया
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