Monday, 6 January 2025

एक धोखा था वहम था

ज़ंजीर सारे कागज़ के बने थे फंदा महज़ भरम था
कैसे कह दें की यह कोई सज़ा थी कोई सितम था

आसमाँ का झुकना  ज़मीं से मिलना हाथ मिलाना    
जब भी ऐसा देखा था  वह एक धोखा था वहम था

सदाएँ दिल को चुभती थी शक़्ल आँखें जलाती थी
कैसे कह दें कि साथ उसका फ़ज़्ल-ओ-करम था

यार पुराना वर्षों बाद मिला कैसी अजनबिय्यत थी    
मिलकर लगा ऐसा कि जैसे कोई दूसरा जनम था

कि वो हाथ मिलाना गले मिलना आँखें चार करना     
यह सब का सब तक़ल्लुफ़ यक़ीनन चार-ख़म था 
      
लिखी हुई कुछ बातें मिटाई भी गई जलाई भी गई   
ज़माने के निगाह में 'धरम' जो लौह-ओ-क़लम था 
 

फ़ज़्ल-ओ-करम : मेहरबानी-ओ-इनायत
चार-ख़म : कुश्ती का एक दांव
लौह-ओ-क़लम : तख्ती और उस पर लिखने का क़लम, वह तख्ती जिस पर भविष्य में होने वाली सारी घटनाएँ लिखी हुई हैं और वह लेखनी जिसने यह सब कुछ ईश्वर की आज्ञा से लिखा है

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